सुप्रीम कोर्ट में कुछ महीनों से सब ठीक नहीं हो रहा है-4 जजों ने एकस्वर में कहा

By 05:21 PM, 12.January 2018 Custom Tag

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट में 4 जस्टिस पहली बार मीडिया के खुलकर सामने आये और उन्होंने कहा कि किसी भी देश के कानून के इतिहास में यह बहुत बड़ा दिन है, सुप्रीम कोर्ट के एडमिनिस्ट्रेशन का काम ठीक से नहीं हो रहा है। हमने यह पत्रकारवार्ता इसलिये की है, ताकि हमें कोई यह न कहें कि हमने आत्मा बेच दी। पिछले कुछ महीनों में सुप्रीम कोर्ट में बहुत कुछ ऐसा ही हुआ है, जो नहीं होना चाहिये था। हमें लगा, हमारी देश के प्रति जवाबदेही है और हमने सीजेआई को मनाने की कोशिश की, लेकिन हमारी कोशिश नाकाम रहीं। अगर संस्थान को नहीं बचाया तो देश में लोकतंत्र नहीं बचेगा। आपको बता दें कि इस कॉन्फ्रेंस में न्यायमूर्ति जे चेलामेश्वर, न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति मदन भीमराव लोकुर और न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ उपस्थित थे। कोर्ट के सूत्रों के अनुसार, जजों की पत्रकारवार्ता के बाद सीजेआई ने अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल को बैठक के लिये बुलाया है। 
प्रेस कॉन्फ्रेंस की अहम बातें
इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ. जस्टिस चेलामेश्वर
जस्टिस चेलामेश्वर ने कहा. यह एक अद्भुत मौका है। कम से कम भारत के इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। कुछ समय से सुप्रीम कोर्ट की एडमिनिस्ट्रेशन वो काम नहीं कर रही है जो उसे करना चाहिए। दुर्भाग्य से हमारी कोशिशें फेल हो गई हैं। जब तक हम आवश्यक सवालों के जवाब नहीं देंगे,  तब तक डेमोक्रेसी सुरक्षित नहीं होगी। 2 महीने से जो हालात हैं,  उनकी वजह से हमें आज ये पत्रकारवार्ता करनी पड़ रही है। हम देश की जनता को सबकुछ बताना चाहते हैं। हम अब तक चीफ जस्टिस को समझा नहीं पाए हैं। हम आज यहां हैं। कल शनिवार है फिर संडे है। साफ कर दें कि हम सोमवार को कोर्ट जाएंगे। हम आपसे इसलिए बात कर रहे हैं,  क्योंकि हम देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी से नहीं भागना चाहते। कल कोई ऐसा न कहे कि हमने अपनी आत्मा बेच दी है। इसलिए हमने मीडिया से बात करने का फैसला किया। यह पत्रकारवार्ता जस्टिस चेल्मेश्वर के घर पर ही ऑर्गनाइज की गई।
सब ठीक नहीं चल रहा है-जस्टिस गोगोई
जस्टिस गोगोई ने कहा -हमें जो परेशानी है, उसको लेकर चीफ जस्टिस से बात कर चुके हैं, लेकिन दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि अब भी सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। 
आप अपने शब्द हमारे मुंह में न डालें
जस्टिस चेलामेश्वर से पूछा गया कि क्या वह सीजेआई के खिलाफ महाभियोग लाना चाहते हैं, इस पर उन्होंने कहा कि आप अपने शब्द हमारे मुंह में मत डालिये।
पीएम ने कानून मंत्री को बुलाया
मीडिया रिपोटर््स के अनुसार 4 जजों की पत्रकारवार्ता के बाद पीएम नरेन्द्र मोदी ने तत्काल केन्द्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद को बैठक के लिये बुलाया ।
कौन है चारों जज 
जस्टिस जे चेलामेश्वर
सुप्रीम कोर्ट के दूसरे नम्बर के सबसे सीनियर जज हैं और आप आंध्रप्रदेश हाईकोर्ट के एडिश्नल जज और 2007 में गुवाहाटी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने, उन्हें केरल हाईकोर्ट का मुख्य न्यायधीश बनाया गया। अक्टूबर 2011 में वह सुप्रीम कोर्ट के जज बनाये गये। 
चर्चाओं में रहे इसलिये कि
जस्टिस जे चेलामेश्वर ने पिछले वर्ष मई में सुप्रीम कोर्ट में वाईफाई सुविधा न होने को लेकर सवाल उठाया था और जे चेलामेश्वर और फॉली नरीमन की 2 जजों की बैंच ने ही इस कानून को रद्द किया था, जिसके तहत पुलिस को किसी भी ऐसे शख्स को गिरफ्तार करने आदेश था, जिसने किसी को कुछ मेल किया हो या कोई इलेक्ट्रॉनिक मैसेज दिया हो, जिससे किसी को कुछ परेशानी हुई हो । वह आधार से जुड़े प्रायवेसी के मामले की सुनवाई करने वाली बेंच में भी जज रहे थे। 
जस्टिस रंजन गोगोई
जस्टिस रंजन गोगोई ने 2012 में सुप्रीम कोर्ट में जज के रूप में शपथ ग्रहण की थी, इससे पूर्व वह पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के र्जिस्टस थे, वह गुवाहाटी हाईकोर्ट में भी वह अपनी सेवायें दे चुके हैं। 
चर्चाओं में रहे इसलिये कि
कोलकाता हाईकोर्ट के जस्टिस सीएस कर्णन को सजा सुनाने वाली 7 जजों की बेंच में वह जज थे, सरकारी विज्ञापनों में राज्यपाल, केन्द्रलीय मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों और राज्य मंत्रियों की फोटो के उपयोग की इजाजत दी थी। सुप्रीम कोर्ट का पिछले फैसला बदल दिया था। 

जस्टिस मदन लोकुर
जस्टिस मदन भीमराव लोकुर ने 1977 में बतौर लॉयर करियर की शुरूआत की और उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट में वकालात की और फिर वह फरवरी 2010 से मई तक दिल्ली हाईकोर्ट में एक्टिंग चीफ जस्टिस रहें,  जून में वह गुवाहाटी हाईकोर्ट और बाद में आंध्रप्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बनाये गये। 
चर्चाओं में रहे इसलिये कि
बिहार के एक मामले में बगैर तलाक लिये कानूनी तौर पर पति से अलग रह रही पत्नी को गुजारा भत्ता देने का फैसला सुनाया था। ओपन जेल के कंसेप्ट पर गृह मंत्रालय को बैठक करने का निर्देश दिया था और कोर्ट का कहना था कि अगर ऐसा होता है तो जेल में अधिक कैदियों की परेशानियों से निजात मिलेगी। 
जस्टिस कुरियन जोसफ
जस्टिस कुरियन जोसफ ने कानून के क्षेत्र में अपना करियन 1979 से शुरू किया था और 2000 में उन्हें केरल हाईकोर्ट का जज बनाया गया था, 2010 में वह हिमाचल प्रदेश के हाईकोर्ट के चीफ जस्टिम बनाये गये थे। 8 मार्च 2013 को सुप्रीम कोर्ट के जज बनाये गये।

चर्चाओं में रहे इसलिये कि
ट्रिपल तलाक को गैर कानूनी करने का ऑर्डर देने वाली 5 जजों की बेंच में शामिल थे। गुड फ्राइडे के कारण से वह परिवार के साथ केरल में हैं और इस मौके पर होने वाले डिनर में नहीें आ पायेंगे। उन्होंने यह भी लिखा है कि दीवाली, दशहरा, होली, ईद, बकरीद जैसे शुभ और पवित्र दिनों में ऐसा कोई आयोजन नहीं होता है।
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