भाजपा में मप्र के ब्राहम्ण नेता लूपलाईन में

By 06:34 AM, 23.May 2018 Custom Tag

भोपाल. क्या मप्र के ब्राहम्ण भाजपा से नाराज चल रहे हैं, चुनावी वर्ष में यह प्रश्न इसलिये भी उठ रहा है कि राजधानी में पिछले डेढ़ माह से सीएम शिवराजसिंह के दो कार्यक्रमों में उनके सामने विचित्र स्थिति निर्मित हो गयी। एक कार्यक्रम में तो सीएम को अपना भाषण अधूरा छोड़कर जाना पड़ा। वही सोमवार को भोपाल के मॉडल स्कूल में हुए कार्यक्रम ने एक ब्राहम्ण छात्र के सवाल शिवराज सिंह असहज हो गये। 
बड़े नेताओं की हो रही उपेक्षा
दरअसल ब्राह्मणों को मप्र में भाजपा का समर्थक माना जाता रहा है। लेकिन सरकारी नौकरियों में आरक्षण में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद दिए गए सीएम शिवराज सिंह के बयान के बाद स्थितियां बदल गईं और ब्राह्मण समाज में विरोध के स्वर देखने को मिलने लगे। रही सही कसर पार्टी में प्रदेश में लंबे समय से ब्राह्मण समाज के नेताओं को लूप लाइन में डालने से हो गई। पार्टी के पास पहले पूर्व सीएम कैलाश जोशी,  पूर्व कैबिनेट मंत्री अनूप मिश्रा,  लक्ष्मीकांत शर्मा और पूर्व सांसद रघुनंदन शर्मा जैसे इस वर्ग में पैठ रखने वाले नेता थे। कैलाश जोशी उम्र के चलते साइड लाइन कर दिए गए। बाकी को पार्टी ने हाशिए पर डाल दिया।
प्रदेश में भाजपा का बड़ा नेता ब्राहम्ण नहीं
सीएम शिवराजसिंह की कैबिनेट में कई ब्राहम्ण मंत्री भी है, लेकिन इनकी समाज में प्रति सक्रियता कभी भी नहीं रहीं, कुल मिलाकर देखा जाये तो संगठन औरसरकार में एक भी बड़ा ब्राहम्ण नेता नहीं हैं और जो हैं भी उन्हें लूपलाईन में डाल दिया गया है। स्वयं सीएम शिवराजसिंह ओबीसी वर्ग से आते हैं। क्षत्रिय वर्ग से प्रदेश में नरेन्द्रसिंह तोमर, नंदकुमारसिंह चौहान और कप्तानसिंह, भूपेन्द्रसिंह जैसे धाकड़ नाम शामिल हैं, लेकिन ब्राहम्ण वर्ग मेंबड़े नेताओं का टोटा हैं। 
अनूप मिश्रा और लक्ष्मीकांत शर्मा भी इन दिनों लूपलाईन में है
2013 से पूर्व पीएम अटलबिहारी बाजपेयी के भांजे अनूप मिश्रा भाजपा सरकार में ब्राहम्णों के दमदार नेता माने जाते थे लेकिन कुछ समय से अपनी ही पार्टी से नाराज चल रहे हैं। इसी हफ्ते उन्होंने सीएम को लगातार हो रही अनदेखी को लेकर पत्र भी लिखा है और अनूप सार्वजनिक तौर पर कह चुके हैं कि उनका पार्टी में अपमान हो रहा है और यह अपनी पराकाष्ठा पार कर चुका है। हालत यह है कि मुरैना से सांसद अनूप की उनके संसदीय क्षेत्र में छोटे अधिकारी तक नहीं सुनते हैं जिला प्रशासन उनको स्थानीय कार्यक्रमों तक में नहीं बुलाता है। 
लक्ष्मीकांत शर्मा
पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा प्रदेश सरकार में मंत्री होने के साथ ही ब्राह्मण वर्ग में खासी पैठ रखा करते थे। विधानसभा चुनाव में हार के बाद और व्यापमं मामले में जेल जाने के बाद राजनीति से दूर हो गए।  इसी तरह ब्राह्मण नेता रघुनंदन शर्मा से भी भाजपा संगठन ने दूरी बना रखी है। शर्मा अपनी अनदेखी से इस कदर नाराज है कि उन्हें जब भी मौका मिलता है अपनी ही पार्टी की सरकार को घेरने से नहीं चूकते।

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