देश ने मुझे जिस आशा और अपेक्षा से बैठाया आपका भरोसा नहीं टूटने दूंगा-ओमान में मोदी बोले

By 10:43 PM, 11.February 2018 Custom Tag

मस्कट. पीएम नरेन्द्र मोदी ने रविवार कीशाम यूएई से ओमान पहुंचे और यहां उन्हें ओमान के डिप्टी पीएम सैयद फहद बिन मोहम्मद अल सईद ने रिसीव किया है। पीएम को गोर्ड ऑफ ऑनर भी दियागया। इसकेबाद पीएम ने मस्कट के स्टेडियम में भारतीय लोगों को संबोधित किया है। देश की 3 भाषाओं में लोगों को नमस्कार करने के बाद पीएम ने कहा अगर मैं देश की विभिन्न भाषाओं से नमस्कार करने लगूंगा तो कई घंटे गुजर जायेंगे। सरकार की तरफ से तो 1 राजदूत होता है, लेकिन देश की तरफ से लाखों राष्ट्रदूत ओमान में बैठे हैं । मैं चायवाला हूं इसलिये मुझे मालूम हैं कि 90 पैसे में चाय भी नहीं आती है हम बीमा दे रहे हें । देश ने जिन आशाओं और अपेक्षाओं से बैठाया है, उसे कभी खरोंच नहीं आने दूंगा। अहम बात यह है कि यह स्टेडियम के रॉयल बॉक्स से स्पीच करने वाले मोदी पूर्व विदेशी मेहमान हैं इस बॉक्स का उपयोग सिर्फ ओमान के शाह ही करते आये हैं।  
इतनी विविधता केवल हमारे देश में
प्रधानमंत्री ने कहा कि इतनी विशाख संख्या में यहां पधारे हुए मेरे प्यारे देशवासियों। आप सबको बहुत बहुत नमस्कार (कई भाषाओं में नमस्कार किया) यह हमारे देश की कितनी बड़ी शक्ति है कि अपने यहां कि भाषाओं और बोलियों में नमस्कार करने लगूं तोकई घंटे निकल जायेंगे। यह विविधता पूरी दुनिया में और किसी देश में नहीं मिलेगी। आज मैं मेरे सामने भारत के बाहर ओमान की धरती पर एक मिनी इंडिया देख रहा हूं कि देश के अलग अलग कोनों से आये हुए भारतीय अलग अलग क्षेत्रों में काम करने वाले भारतीयों की एक भव्य तस्वीर का निर्माण देख रहा हूं। मेरे साथ पूरी ताकत से बोलिये-भारत माता की जय। 
हजारों वर्ष पुराने रिश्ते
अधिकृत दौरा तो मेरा आज शुरू हो रहा है, लेकिन 10 वर्ष पहले जब मैं गुजरात में सीएम था,  तो सीएम के तौर पर मेरी अफ्रीका की यात्रा थी और इसी दौरान मैं सलाला से होकर गुजरा था। कुछ समय वहां रुका था और उस समय जिनसे मुलाकात हुई थी,  उनसे मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। लंबे अरसे से ओमान आने का,  आपको बीच आने का और आपसे मिलने का मन करता था। लेकिन,  यह अवसर आज आया है। ओमान सरकार को,  प्रशासन को,  उन व्यवस्थाओं के लिए दिल से धन्यवाद देता हूं।
साथियों,  भारत और ओमान के बीच संबंध सैकड़ों.हजारों साल पुराने हैं। 5 हजार वर्ष पहले भी गुजरात के लोथल पोर्ट से लकड़ी के जहाज ओमान तक आते थे। लौटते वक्त यह जहाज लोथल से भी आगे दक्षिण की तरफ भारत के समुद्री तटों से होते हुए श्रीलंका तक जाते थे। इन हजारों वर्षों में व्यवस्थाएं बदल गईं,  भारत में गुलामी का लंबा कालखंड आया,  लेकिन हमारे सदियों पुराने व्यापारिक और आत्मीय संबंध वैसे ही बने रहे। भारत की आजादी के बाद आर्थिक,  व्यापारिक और सामाजिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए इंस्टीट्यूशंस विकसित हुए।
ओमान में लाखों राष्ट्रदूत हैं
मप्र में जो बीना रिफायनरी है, वह रिफायनरी ओमान के सहयोग स ेचल रही है वही भारतीय कंपनियों के डेढ़ हजार से अधिक ज्वाइंट वेंचर्स यहां ओमान में काम कर रहे हैं, ओमान की प्रगति और विकास में भारत, हमारे होनदार राष्ट्रदूत यह आपकी सबकी भागीदारी रही है। सरकार की ओर से तो एक राजदूत होता है, लेकिन देश की ओर से लाखों राष्ट्रदूत ओमान में बैठे हुए हैं। आपने देखा होगा कि पिछले 3 वर्ष से हम किस प्रकार एक नीति बनाकर खाड़ी के देशों के साथ भारत के पुराने और दोस्ती भरे रिश्तों को आज के समय के अनुसार एक नया जामा पहना रहे हैं और नई ऊंचाईयों पर ले जा रहे हैे।
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