पुलिस सुरक्षा दायर में मल्टीप्लेक्स में रिलीज हुई पद्मावत

By 04:47 PM, 13.February 2018 Custom Tag

ग्वालियर. संजय लीला भंसाली निर्देशित विवादित फिल्म पद्मावतआखिरकार 19 दिन बाद ग्वालियर में रिलीज हो गई। मल्टीप्लेक्स में यह फिल्म सोमवार को चली जबकि सिंगल स्क्रीन ने इससे अभी दूरी बनाए रखी है। फिल्म से जुड़े जानकारों का कहना है कि मल्टीप्लेक्स में फिल्म के लगने के बाद फिल्म के प्रति शहर में क्या माहौल है यह समझ में आ जाएगा इसके बाद 16 फरवरी से यह सिंगल स्क्रीन पर भी लगा दी जाएगी। फिल्म देखकर आने वाले ज्यादातर दर्शकों का कहना है कि फिल्म में ऐसा कुछ भी नहीं है जिसको लेकर करणी सेना विरोध कर रही है बल्कि यह सब कुछ पब्लिसिटी स्टंट है।
यही कारण है कि रिलीज के 10 दिन बाद ही करणी सेना का फिल्म का विरोध नहीं करने के पत्र भी सोशल साइट्स पर वायरल हो गए। फिल्म के लिए सुबह से सुरक्षा के लिए पुलिस तैनात रही। फिल्म प्रदर्शन के बीच किसी प्रकार की कोई उत्पात नहीं हो इसके लिए मल्टीप्लेक्स में भी पुलिस फिल्म देखने जाती रही। लेकिन किसी प्रकार की कोई घटना नहीं हुई।
विवाद नहीं होता तो कोई देखने भी नहीं जाता
फिल्म पद्मावत का अगर इतना विरोध नहीं होता तो यह कभी भी हिट नहीं हो सकती थी क्यों कि बेहद ढीली ढाली फिल्म है। क्लाइमेक्स सीन जबरन लंबा खींच दिया गया है। भव्यता रचने के चक्कर में पूरी फिल्म अंधेरे में चलती है और ड्रामा नाकाम रहे हैं। रणवीर की एक्टिंग अच्छी थी। यह कहना था विवेक रजक का।
करणी सेना मूवी देखती 2 लोग भी नहीं आते सड़क पर फिल्म में राजपूतों की आन बान और शान को बढ़ा चढ़ाकर दिखाया गया है। राजा रतन सिंह की पीठ में कई तीर घुस जाते हैं लेकिन वह मुंह के बल नहीं गिरते उनकी मौत जब होती है तो वह घुटने के बल बैठकर सीना ताने आकाश की तरफ देख रहे होते हैं। महारानी पùावती की शान में खूब कसीदे काढ़े गए हैं। करणी सेना वाले अगर फिल्म देखकर विरोध की सोचते तो ऐसा कुछ भी नहीं है। यह कहना है सीमा खंडेलवाल का।
जैसा सोचा वैसा कुछ नहीं था- दर्शक बोले 
फिल्म में राजपूतों के बारे में बताया गया है। उनकी शौर्य गाथा जो हमें अभी तक नहीं पता थी इस फिल्म के द्वारा हमें उनके इतिहास के बारे में जानने का मौका मिला जिससे हम उनकी आन बान और शान को जान पाए। फिल्म में विरोध जैसा कुछ भी नहीं है। यह कहना है आयुषी का।
खिलजी का रोल अच्छा था उसको रणवीर सिंह ने काफी अच्छी तरह निभाया है। इस फिल्म को में रणवीर के रोल के कारण ही  देखने आया था। अगर यह फिल्म राजपूत देखते तो उन्हें गर्व होता कि वह राजपूत है। यह कहना है हेमन्त पचौरी का।
फिल्म में शुरू से कुछ खास नहीं दिखाया गया फिल्म जैसा सोचकर आए थे वैसी नहीं थी लेकिन फिल्म के लास्ट सीन में जिस प्रकार राजपूतों के बारे में बताया है वो काफी अच्छा है। अपने पति को बचाने  के लिए पदमावती किस प्रकार त्याग करती है। इसे काफी अच्छे से दिखाया है। यह कहना था राधा का।
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