7वां वेतनमान देने की तैयारी अध्यापकों को जनवरी 2018 से

By 05:11 PM, 16.May 2018 Custom Tag

भोपाल। मप्र के 2 लाख 84 हजार अध्यापकों को 7वां वेतनमान 1 जनवारी 2018 से देने की तैयारी चल रही है। इसे लेकर अध्यापक संगठनों के नेताओं और स्कूल शिक्षा व वित्त विभाग के अधिकारियों के बीच चर्चा हो चुकी है लेकिन अध्यापक अधिकारियों  के इस प्रस्ताव से सहमत नहीं हैं। वह  प्रदेश के नियमित कर्मचरियों की तरह 1 जनवरी 2016 से वेतनमान की मांग कर रहे हैं। अध्यापकों की 2 बड़ी मांगे हैं। पहला स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन और दूसरा नियमित कर्मचारियों की तरह 7 वां वेतनमान। सरकार भी दोनों मांगों को पूरा करने की तैयारी में है लेकिन अध्यापकों की मर्जी के माफिक नहीं।
वेतनमान को लेकर 3 दौर की बैठक हो चुकी है लेकिन सरकार और अध्यापकों के बीच सहमति नहीं बन पाई है। इसे लेकर मान मनोव्वल और प्रदर्शन का दौर जारी है। सूत्र बताते हैं कि 7 वें वेतनमान को लेकर स्कूल शिक्षा और वित्त विभाग दोनों तरह के प्रस्ताव तैयार कर रहा है। यदि अध्यापक नहीं माने तो 2016 से वेतनमान देने का निर्णय भी लिया जा सकता है।
पहले संविलियन- फिर वेतनमान
25 सितंबर 2015 को लालघाटी चौराहे पर निकाली गई तिरंगा यात्रा के बाद 25 दिसंबर 2015 को सीएम शिवराज सिंह चौहान ने अध्यापकों को 6वां वेतनमान देने की घोषणा करते हुए कहा था कि यह घोषणा इसलिए की जा रही है ताकि अध्यापकों को 7वें वेतनमान से वंचित न रहना पड़े।
अध्यापक सीएम की इसी घोषणा को आधार बनाकर 7वें वेतनमान की मांग कर रहे हैं। सरकार भी इसकी तैयारी जोरों से कर रही थी लेकिन इसी बीच अध्यापकों ने शिक्षा विभाग में संविलियन को लेकर दवाब बनाया और सीएम ने इसकी भी घोषणा कर दी। अब सरकार पहले संविलियन और फिर वेतनमान देने पर काम कर रही है।
अधिकारियों का तर्क है कि संविलियन होगा तो अध्यापक नियमित कर्मचारी हो जाएंगे और फिर 7वां वेतनमान देना ही पडे़गा। इसलिए पहले संविलियन ही कर लिया जाए। इस मामले में स्कूल शिक्षा विभाग की प्रमुख सचिव दीप्ति गौड़ मुखर्जी कर कहना  है कि इस बारे में वित्त विभाग के अधिकारी ही बता सकते हैं।

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