जीवाजी विश्वविद्यालय में चल रहा घमासान , मैंने न निर्देश दिए न कॉस्ट बढ़ाने को कहाः कुलसचिव जेयू

By 07:43 AM, 13.March 2018 Custom Tag

ग्वालियर. जीवाजी यूनिवर्सिटी में बनाए जा रहे मल्टी आर्ट कॉम्पलेक्स की लागत बिना अनुमति 4 करोड़ 35 लाख रूपये़ बढ़ाए जाने की खबर नजर में आने के बाद सोमवार को कुलसचिव आनंद मिश्रा ने पीआईयू के चीफ इंजीनियर राजीव शर्मा को पत्र लिखकर निर्माण घोटाले की परतें खुद ही उधेड़ दीं। पत्र में कुलसचिव ने लिखा है कि मैंने निर्माण एजेंसी पीआईयू के कार्यपालन यंत्री प्रदीप अष्टपुत्रे को न मौखिक निर्देश दिए थे न ही लिखित तौर पर ऐसा करने को कहा था। कुलसचिव ने पत्र में लिखकर कहा है कि ईई प्रदीप अष्टपुत्रे का मेरे बारे में यह जानकारी देना कि मैंने मौखिक निर्देश दिए थे दुर्भाग्यपूर्ण व गलत जानकारी देना है। कुलसचिव ने पत्र में लिखा है कि चूंकि 4 करोड़ 35 लाख रुपए के अतिरिक्त काम का ठेका जिस मैसर्स वसुंधरा कंस्ट्रक्शन को दिया है जिसकी दरें अन्य फर्मों की दरों से 3 गुना अधिक हैं। ऐसे में जीवाजी यूनिवर्सिटी का 10 से 17 प्रतिशत तक नुकसान  होने की संभावना है। इसलिए आप जो भी कार्यवाही करें किसी भी सूरत में जीवाजी विश्वविद्यालय  को नुकसान नहीं होना चाहिए।
उल्लेखनीय  है कि जेयू में मल्टी आर्ट कॉम्पलेक्स निर्माण की लागत बिना अनुमति बढ़ाए जाने से जेयू को 56 लाख के नुकसान की आशंका है। इसलिए कॉम्पलेक्स की निर्माण एजेंसी पीआईयू के चीफ इंजीनियर राजीव शर्मा ने कार्यपालन यंत्री प्रदीप अष्टपुत्रे को नोटिस भेजकर पूछा था कि आपने मल्टी आर्ट कॉम्पलेक्स में 4 करोड़ 35 लाख रुपए अतिरिक्त काम का ठेका मैसर्स वसुंधरा कंस्ट्रक्शन को किसके कहने पर दिया। मुझे आपके द्वारा भेजे पत्र में यह भी कहा गया था कि राष्ट्रपति की 11 फरवरी की यात्रा को देखते हुए यह काम बढ़ाए गए है। इसलिए मुझे आप यह बताएं कि ऐसा करने के लिए क्या मप्र शासन जिले के कलेक्टर या जीवाजी विश्वविद्यालय  की कुलपति ने कोई लिखित आदेश आपकों दिया था, इस नोटिस के जवाब में कार्यपालन यंत्री प्रदीप अष्टपुत्रे ने चीफ इंजीनियर को 28 फरवरी 2018  को  पत्र लिखकर बताया था कि उन्हें ऐसा करने के लिए जीवाजी विश्वविद्यालय  के कुलसचिव आनंद मिश्रा ने मौखिक तौर पर निर्देश दिए थे।
जीवाजी विश्वविद्यालय  को 10-17 प्रतिशत तक नुकसान की आशंका  
कुलसचिव का पत्र
सोमवार को जीवाजी विश्वविद्यालय  के कुलसचिव आनंद मिश्र की ओर से पीआईयू के चीफ इंजीनियर को लिखा गया पत्र।
वीसी मैं और रेक्टर तकनीकी एक्सपर्ट नहीं पीआईयू को ही लेना थी प्रशाकीय स्वीकृति 
मैंने आज ही लोक निर्मण विभाग की विंग पीआईयू के चीफ इंजीनियर राजीव शर्मा को पत्र लिखकर बता दिया है कि 4 करोड़ 35 लाख के अतिरिक्त काम कराने के कोई मैखिक निर्देश नहीं दिए। बगैर प्रशासनिक स्वीकृति के वह किसी के ठेका दे रहे हैं या नहीं ऐसा करने से पहले उन्हें जीवाजी विश्वविद्यालय  के साथ हुए अनुबंध को देखना चाहिए था। उसमें सब कुछ स्पष्ट है। आप ही बताओ कि क्या कुलपति मैं व रेक्टर कोई तकनीकी एक्सपर्ट हैं क्या। पीआईयू तकनीकी मामलों की जानकार है उसे पता होना चाहिए कि ठेका देने से पहले प्रशासनिक स्वीकृति लेनी चाहिए या नहीं। वह जानकार हैं इसलिए उनके साथ अनुबंध किया था। वे ऐसे पल्ला नहीं झाड़द सकते। आपके सभी सवालों के जवाब पीआईयू ही देगी।
सोमवार को लिखा कुलसचिव ने लेटर डाली पिछली डेट 
आनंद मिश्रा, कुलसचिव, जेयू
ईई का पत्र
28 फरवरी को ईई द्वारा सीई को लिखा गया पत्र जिसमें उन्होंने कुलसचिव के मौखिक निर्देश का हवाला दिया। कुलसचिव आनंद मिश्रा ने सोमवार को पीआईयू लोक निर्माण विभाग के चीफ इंजीनियर राजीव शर्मा को पत्र लिखा लेकिन इस पर डेट 8 मार्च की डाली। पीए ने डेट गलत लिख दी पत्र सोमवार को ही लिखा गया है आमने सामने
विजिट में अतिरिक्त काम करने के मौखिक निर्देश देते हैं और अब वे ही कर रहे हैं इनकार
कुलसचिव और कुलपति दोनों के मौखिक निर्देश पर ही मैंने 4 करोड़ 35 लाख रुपए के काम अतिरिक्त कराकर उसका ठेका वसुंधरा कंस्ट्रक्शन को दिया है। मैं यह समझ नहीं पा रहा हूं कि इस काम कि लिए जेयू ने 4 करोड़ 35 लाख रुपए की स्वीकृति दी। उसी दर पर दी जिस पर वसुंधरा  कंस्ट्रक्शन पहले से काम कर रही थी। फिर इसमें जेयू प्रशासन की ओर से 10 से 17 प्रतिशत नुकसान होने की बात कहां से सामने आ रही है। यह लोग मौके पर आकर विजिट करते हैं अतिरिक्त काम कराने के मौखिक निर्देश देते हैं और अब जेयू के कुलसचिव मेरे चीफ इंजीनियर को पत्र लिखकर मौखिक निर्देश नहीं देने की बात कहकर विरोधाभास पैदा कर रहे हैं। जेयू प्रशासन में बैठे लोगों को तकलीफ है कि करोडों रुपए का यक काम पीआईयू कर रहा है उनके अपने हित इसमें होंगे।
जेयू में 13 करोड़ रुपए लागत का मल्टीआर्ट कॉम्पलेक्स बनाया जाना था राष्ट्रपति की विजिट के नाम पर अचानक 4.35 करोड़  के अतिरिक्त काम जोड़कर लागत बढ़ाकर वर्क ऑर्डर दे दिया गया। जबकि इसक लिए किसी तरह की प्रशासकीय स्वीकृति व कार्यपरिषद की मंजूरी नहीं ली गई।
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