राष्ट्रीय कलाबोध कार्यशाला का प्रारम्भ

By 11:31 PM, 10.January 2018 Custom Tag

ग्वालियर.राजा मानसिंहतोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय ग्वालियर में बुधवार को राष्ट्रीय कलाबोध कार्यशाला का प्रारम्भ हुआ। यह कार्यशाला विश्वविद्यालय एवं संस्कृति संचालनालय मप्र शासन भोपाल के संयुक्त तत्वावधान में विश्वविद्यालय में बुधवार की सुबह आयोजित की जा रही है। कार्यशाला में देश के विभिन्न प्रांतों से लगभग 250 प्रतिभागी सम्मिलित हुए हैं।.
कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में साडा अध्यक्ष राकेश जादौन, विशिष्ट अतिथि संस्कार भारती के राष्ट्रीय संरक्षकयोगेन्द्र बाबा, एमिटी यूनिवर्सिटी के कुलपति वीके शर्मा उपस्थित थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. लवली शर्मा ने की।
उद्घाटन सत्र के पश्चात् व्याख्यान सत्र आयोजित किया गया जिसमें भोपाल के प्रो. एलएन भवसार का ललितकला विषय पर व्याख्यान हुआ। आपने अपने व्याख्यान में कालीदास के नाटकों में ललित कला सौंदर्य पक्ष पर सविस्तार जानकारी दी। भाव भंगिमाओं की चर्चा करते हुए आपने कहा कि भाव का उद्दीपन भंगिमाओं द्वारा होता है, चित्र रचना करते समय चित्रकार को चित्रित विषय की मर्यादा का विशेष ध्यान रखना होता है कि उनके द्वारा की गई रचना से अर्थ का अनर्थ न हो। एक चित्रकार की तूलिका में समाज एवं देश को दिशा देने की ताकत होती है। व्याख्यान के पश्चात् समस्त विभागों कार्यशालाएॅं प्रारम्भ हुईं। समस्त विषय विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को संगीत एवं कला की बारीकियों से अवगत कराया। आज के दिन का समापन शास्त्रीय संगीत सभा से हुआ। जिसमें पद्मश्री सुमित्रा गुहा का शास्त्रीय गायन एवं पं. हरीष गंगानी ने कथक नृत्य प्रस्तुत किया। 
सुमित्रा गुहा ने राग पूरियाधनाश्री में स्वरचित रचनाएॅ प्रस्तुत कीं। विलम्बित ख्याल एकताल में निबद्ध था जिसके बोल थे बाजे सुर बाजे। मध्य लय रचना ताल अद्धा में निबद्ध थी जिसके बोल थे कौन करे मोहे पार। दु्रत रचना ताल एकताल में निबद्ध थी जिसके बोल थे चल री सखी सज श्रृंगार। आपने अपने गायन का समापन सूरदास के भजन से किया जिसके बोल थे जो सुख होता गोपाल ही गाए। आपके गायन के साथ तबले पर श्री विकास विपट, हार्मोनियम पर श्री विवेक जैन तथा तानपूरे पर कु. अश्विनी तेलंग एवं कु. मोहिता वले ने की।
शास्त्रीय गायन के पश्चात् जयपुर घराने के वरिष्ठ कलाकार पं. हरीश गंगानी ने कथक नृत्य प्रस्तुत किया। आपने अपने कार्यक्रम का प्रारम्भ गुरू वंदना से किया। इसके पश्चात् आपने परम्परात कथक नृत्य में उपज, चलन ठाठ, उठान गणेश परन, तिहाई प्रस्तुत कीं। इसके पश्चात् आपने द्रुत 3ताल में जयपुर घराने की परम्परागत रचनाएॅ प्रस्तुत कीं। आपके साथ पढन्त डॉ. अंजना झा, तबला संगति हितेश मिश्र, सारंगी संगति अब्दुल हमीद खान तथा हार्मोनियम एवं गायन संगति मनोज बमरेले ने की। 
कार्यशाला में प्रतिदिन आयोजित संगीत सभा में गुरूवार को प्रो. सरोज घोष का सितार वादन एवं सुश्री गायत्री डेके एवं सुश्री देवास्मिता ठाकुर का युगल भरनाट्यम नृत्य शुक्रवार को पं. किरण देशपाण्डे का एकल तबला वादन तथा पं. ऋत्विक सान्याल का ध्रुपद गायन तथा शनिवार को चेतन जोशी का बॉंसुरी वादन होगा। 
कार्यक्रम में अतिथियों समेत कुलपति प्रो. लवली शर्मा, प्रभारी कुलसचिव अजय शर्मा, बाबा गंगादास की शाला के महंत पं. रामसेवकदास जी, समस्त विभागों के प्रभारी, छात्र-छात्राएॅ तथा संगीत रसिक उपस्थित थे। कार्यक्रम का संयोजन प्रो. रंजना टोणपे एवं सह संयोजन डॉ. हिमांशु द्विवेदी द्वारा किया जा रहा है। कार्यक्रम का संचालन डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने किया।
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